ISDN क्या हैं ? [ Integrated Services Digital Networks - हिंदी में ]

ISDN क्या हैं ? [ Integrated Services Digital Networks - हिंदी में ]


Integrated Services Digital Networks (ISDN) क्या हैं ? 

यह एक नेटवर्किंग concept है जिसे कि voice, video तथा data services के integration के लिये digital transmission media का उपयोग किया जाता है तथा circuit व packet switching technique को combine किया जाता है। 

Access server के लिए ISDN को भी प्रयोग कर सकते हैं। यह एक विशेष प्रकार की टेलीफोन सेवा सुविधा होती है जो 3 channel की सुविधा प्रदान करती है। जिसमें 2 channel 64Kbps के होते हैं। इनमें B नामक channel data के लिए होता है और D नामक channel connection की setting करता है। B नामक channel अपने अंतर्गत दुगुनी बैंड विड्थ रखते हैं। रिमोट अर्थात् दूरी पर स्थित उपयोगकर्ता के लिए यह तकनीक बहुत ही उपयोगी होती है। इसके अतंर्गत RJ45 नामक टेलीफोन जैक का प्रयोग किया जाता है। इसके कार्य को आगे दिये चित्र से समझ सकते हैं:

Integrated Services Digital Networks (ISDN) क्या हैं ?

ISDN का access path एक digital pipe की तरह act करता है तथा customer व service provider के बीच connection digital facility युक्त होता है। CCITT का recommendation जो कि ISDN से related है जो I-series recommendation में published है । यह recommendation दो प्रकार के user data को carry करने के लिये होता है, जिसमें इसके data channel के साथ associated signaling information को carry करने के लिये होता है अर्थात् सभी information circuit switch signaling का होता है। 


ISDN Channels( आई.एस.डी.एन. चैनल्स ):

Data communication में channel एक ऐसे interface है जिसके द्वारा information flow होता है। एक channel digital or analog signal को carry कर सकता है तथा यूजर data or net signaling information को compare कर सकता है। ISDN communication में तीन basic type के channel define किये गये हैं तथा इन channel के bit rate, function से अलग होते हैं। 

D Channel: 

D Channel network उपयोगकर्ताओं के बीच signal को carry करता है तथा यह user data packet को भी carry कर सकता है । यह 60 Kbps व 64 Kbps bit rate पर operate होते हैं । 

सभी ISDN devices network से एक stand division physical connector का प्रयोग करके attach होता है तथा ये network similar message को requested service के लिये exchange करता है। 

 D Channel का primary function user network के signaling message carry करते है चुकीं signaling message का exchange पूरे available band width का यूज करता है। इसलिये D Channel user packet data के लिये extra band width available होता है। D Channel का secondary function packet mode data को carry करना है। D Channel या तो 16 Kbps या 64 kbps पर operate होता है जो यूजर access interface पर depend करता है। 

B Channel: 

यह channel user service के लिये information जो कि voice, audio, video and digital date को carry करता है। यह 64 Kbps date rate पर operate होता है। B Channel पर exchange signal user के द्वारा requested services के characteristics को describe करते हैं। Example के लिये एक ISDN telephone एक circuit mode connection के लिये request कर सकता है तथा यह 64 kbps पर operate होकर speech Application को support करता यह profile इसके characteristics को describe करता है कि एक call barer service क्या है। इस service को B Channel के द्वारा allocate किया जाता है। B Channel का primary purpose user voice audio data तथा video channel को पहुंचाना होता है। B चैनल को circuit switching तथा packet switching दोनों application के लिये यूज किया जा सकता है। 

H Channel: 

H Channel का function B Channel के समान ही होता है लेकिन यह DSP के ऊपर बिट रेट आपरेट होता है। 64 kbps से higher bit rate की यूजर service को higher channel से request करके या H Channel को request करके प्राप्त किया जा सकता है जो कि B Channel के group के कारण band width provide करता है। 64 Kbps से ज्यादा बिट वाले application , high speed data transfer, high-quality audio, teleconferencing and video services को सम्मिलित करते हैं। 

Single channel के ऊपर first step H० channel होता है । जिसका data rate 384 kbps है। यह एक H1 channel signal interface के across में सभी Ho channel को compare करता है । Ho channel 1.536 Mbps में तथा H12 channel 1.920 Mbps में operate होता है। 


ISDN Signaling (आई.एस.डी.एन. सिग्नलिंग): 

CCITT के द्वारा दो प्रकार के signaling protocol को define किया जाता है जो ISDN व signaling number 7 है। ISDN signal long का प्रयोग अधिकतर data communication में किया जाता है। इसमें एक विशेष प्रकार के protocol का उपयोग किया जाता है जिसे reference model कहा जाता है। 


ISDN Interface: 

Users के द्वारा विभिन्न प्रकार के network को access करने के लिए ISDN interface का उपयोग किया जाता है। इसके लिए अधिकाशत : telephone line का उपयोग किया जाता है। इसमें दो विभिन्न प्रकार के access inter face का उपयोग किया जाता है। जिसे BRI (Basic Rate Interface) व PRI (Primary Rate Interface) कहा जाता है। 


BRI (Basic Rate Interface):

BRI में दो B channel व एक D channel का उपयोग किया जाता है। जिसे 2B + D के नाम से भी जाना जाता है। इसमें D channel से हमेशा 16 kbps के rate से operate किया जाता है। इसका उपयोग one of two ways communication के लिए किया जाता है। इसमें B - channel से 64 kbps के rate से operate किया जाता है। इस प्रकार इसमें data transfer Rate 144 kbps (2x64kbps+16kbps) होता है। 


PRI (Primary Rate Interface): 

PRI के कई possible configuration होते हैं। इसमें सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला 23 B Channel व 1 D Channel होता जो 64 Bite kbps के rate से operate होते हैं। 


Service Requirement (सर्विस रेक्विरेमेंट): 

एक ISDN में यह capabilities होनी चाहिये कि वह different service को handle कर सके। लेकिन कुछ service network में available नहीं होती है।

Network में निम्न service available होती है:

  •  Voice, audio, interactive या bulk data, facsimile, compressed video और full-motion video को handle कर सके। 
  • Demand basis पर band width को allocate कर सके। 
  • Fast call establishment और termination को allow कर सके। 
  • Wide range के transmission speed को handle कर सके। 
  • Low bit error rate, low end-to-end message delay सके। 
  • Various level के communication security provide कर सके।

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